मध्यप्रदेश के गुना नगर में स्थित सीमंधर जिनालय को लेकर इन दिनों जो विवाद सामने आया है, उसने केवल स्थानीय समाज को ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण दिगम्बर जैन समाज को चिंतन के लिए विवश कर दिया है। यह प्रकरण किसी व्यक्ति विशेष, किसी संत विशेष अथवा दो विचारधाराओं के बीच मतभेद का विषय भर नहीं है; यह प्रश्न जैन समाज की धार्मिक मर्यादाओं, ऐतिहासिक सत्य और आस्था केन्द्रों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुना का सीमंधर जिनालय आध्यात्मिक जैन संत श्री कानजीस्वामी की जिनवाणी प्रभावना से प्रेरित स्थानीय मुमुक्षु समाज द्वारा देश के अनेक मुमुक्षु भाइयों के सहयोग से निर्मित कराया गया था। जिनबिम्बों की प्राण-प्रतिष्ठा आगमोक्त विधि ब्रह्मचारी अभिनंदन कुमार जी द्वारा सम्पन्न कराई गई थी। वर्षों से यह जिनालय उसी स्वरूप में श्रद्धालुओं की आराधना का